बंज्याणी के जंगलों में मिली पशुओं की दवाइयों की पेटियां, सिस्टम पर उठे बड़े सवाल

चमोली: उत्तराखंड को अक्सर पशुपालन और कृषि प्रधान राज्य कहा जाता है। यहां की बड़ी आबादी खेती और पशुपालन पर निर्भर है। लेकिन चमोली जिले से सामने आई एक तस्वीर ने सरकारी व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल चमोली जिले के बंज्याणी क्षेत्र के जंगलों में पशुओं के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाइयों की पेटियां मिलने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि इन दवाइयों को चट्टानों के बीच छिपाकर रखा गया था, जबकि कई पेटियां जंगल में यूं ही फेंकी हुई मिलीं।सबसे हैरानी की बात यह है कि जिन दवाइयों की जरूरत गांव-गांव में पशुपालकों को पड़ती है, वही दवाइयां जंगलों में इस तरह से पड़ी मिलीं। अक्सर ग्रामीणों की शिकायत रहती है कि सरकारी पशु चिकित्सालयों में समय पर दवाइयां उपलब्ध नहीं होतीं, जिससे बीमार पशुओं का इलाज नहीं हो पाता। ऐसे में जंगल में दवाइयों का ढेर मिलना कई बड़े सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि यही दवाइयां समय पर गांवों तक पहुंच जातीं, तो कई पशुओं की जान बचाई जा सकती थी। उनका आरोप है कि यह मामला सरकारी लापरवाही या सिस्टम की बड़ी खामी को दर्शाता है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ये दवाइयां जंगल तक कैसे पहुंचीं। क्या किसी ने जानबूझकर इन्हें यहां फेंका या छिपाया, या फिर वितरण व्यवस्था में कहीं गंभीर लापरवाही हुई है, यह जांच का विषय बना हुआ है। मामला सामने आने के बाद लोगों में नाराजगी और हैरानी दोनों देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार एक तरफ पशुपालन को बढ़ावा देने की बात करती है, लेकिन अगर दवाइयों का यही हाल रहा तो पशुपालकों का भरोसा कैसे कायम रहेगा। वहीं पशुपालन विभाग चमोली का कहना है कि मामला संज्ञान में आते ही जांच के लिए कमेटी गठित कर दी गई है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि दवाइयां जंगल में कैसे पहुंचीं और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। फिलहाल बंज्याणी के जंगलों से सामने आई यह घटना केवल एक मामला नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर उठते गंभीर सवालों की कहानी बन गई है। अब देखना होगा कि जांच के बाद क्या इस मामले में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होती है या नहीं।




