सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा, प्रशासनिक हलकों में मचा हड़कंप; UGC बिल और शंकराचार्य प्रकरण पर जताया विरोध

बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा उन्होंने यूजीसी बिल और प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों के साथ हुई कथित घटना के विरोध में दिया है। उनके इस फैसले से पूरे प्रदेश के प्रशासनिक महकमे में खलबली मच गई है। अलंकार अग्निहोत्री 2016 बैच के पीसीएस अधिकारी हैं और वर्तमान में बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने यह इस्तीफा ऐसे समय में दिया है जब पूरा देश 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मना रहा था, जिससे यह मामला और भी चर्चा में आ गया है।
26 जनवरी को इस्तीफा, प्रशासनिक वर्ग में गूंज
सिटी मजिस्ट्रेट जैसे अहम पद से इस्तीफा देना अपने आप में असामान्य कदम माना जा रहा है। अलंकार अग्निहोत्री ने प्रयागराज के माघ मेले के दौरान ज्योतिष पीठ ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों के साथ हुई कथित मारपीट को लेकर गहरा आक्रोश जताया है। उनका कहना है कि यह घटना उन्हें भीतर तक आहत करने वाली है।
सात पन्नों का इस्तीफा, सरकार पर तीखे आरोप
अलंकार अग्निहोत्री ने राज्यपाल और निर्वाचन आयोग को भेजे गए अपने सात पन्नों के इस्तीफा पत्र में केंद्र और राज्य सरकार पर तीखे आरोप लगाए हैं। उन्होंने पत्र के अंत में साफ शब्दों में लिखा है कि “अब न केंद्र में और न ही राज्य में जनतंत्र बचा है, न ही गणतंत्र।
देश में इस समय सिर्फ ‘भ्रमतंत्र’ चल रहा है। यह देशी सरकार नहीं, बल्कि विदेशी जनता पार्टी की सरकार है।” इस बयान के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
UGC बिल का भी किया विरोध
इस्तीफा पत्र में अलंकार अग्निहोत्री ने यूजीसी के नए कानून का भी विरोध किया है। उन्होंने इसे काला कानून करार देते हुए इसे वापस लेने की मांग की है। इस संबंध में उनकी एक तस्वीर भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें वह हाथ में पोस्टर लिए खड़े नजर आ रहे हैं। पोस्टर में लिखा है “#UGC Roll Back, काला कानून वापस लो। शंकराचार्य और संतों को यह अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान।”
प्रयागराज की घटना पर गंभीर आरोप
अपने इस्तीफा पत्र में अलंकार अग्निहोत्री ने लिखा है कि प्रयागराज में मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य, बटुक और ब्राह्मणों के साथ स्थानीय प्रशासन ने मारपीट की। उन्होंने आरोप लगाया कि वृद्ध आचार्यों के साथ दुर्व्यवहार किया गया, बटुक ब्राह्मण को जमीन पर गिराकर पीटा गया, उसकी शिखा पकड़कर घसीटा गया, जो ब्राह्मणों, साधु-संतों का धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीक है , उन्होंने यह भी लिखा कि वे स्वयं ब्राह्मण वर्ण से आते हैं और इस घटना ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से झकझोर दिया है।
ब्राह्मण विरोधी मानसिकता का आरोप
अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पत्र में प्रयागराज की घटना को गंभीर और चिंताजनक बताते हुए कहा है कि इससे यह स्पष्ट होता है कि स्थानीय प्रशासन और वर्तमान राज्य सरकार ब्राह्मण विरोधी विचारधारा के तहत काम कर रही है और साधु-संतों की अस्मिता के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। उन्होंने लिखा कि “ऐसी घटनाएं एक सामान्य ब्राह्मण की आत्मा को कंपा देती हैं।”
शिक्षा और सेवा का भी किया उल्लेख
इस्तीफा पत्र में अलंकार अग्निहोत्री ने खुद को उत्तर प्रदेश सिविल सेवा 2019 बैच का राजपत्रित अधिकारी बताते हुए अपनी शिक्षा काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से होने का भी उल्लेख किया है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि उनका यह फैसला किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि वैचारिक और नैतिक विरोध के तहत लिया गया है।
प्रदेश की राजनीति और प्रशासन में हलचल
सिटी मजिस्ट्रेट स्तर के अधिकारी का इस तरह इस्तीफा देना प्रदेश की राजनीति और प्रशासन दोनों के लिए एक बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि राज्य सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है, क्या प्रशासनिक स्तर पर कोई जांच होगी, और क्या अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा स्वीकार किया जाएगा, फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक चर्चा का विषय बना हुआ है।




