आशारोड़ी–टीमली वन क्षेत्र में अवैध लकड़ी परिवहन का खेल उजागर

देहरादून। राजधानी देहरादून के आशारोड़ी से टीमली के बीच स्थित वन क्षेत्र में अवैध लकड़ी परिवहन का एक गंभीर मामला सामने आया है। हाईवे पर खुलेआम ऐसे ट्रैक्टर दौड़ते देखे जा रहे हैं, जिन पर न तो रजिस्ट्रेशन नंबर अंकित है और न ही नंबर प्लेट लगी हुई है। इतना ही नहीं, इन वाहनों पर ढोई जा रही लकड़ी पर सरकारी मोहर भी नहीं पाई गई, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, इन ट्रैक्टरों में लकड़ी ओवरलोड कर परिवहन किया जा रहा है, जिससे न केवल वन संपदा को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि सड़क सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है। हैरानी की बात यह है कि इस संबंध में जब ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों से शिकायत की, तो उन्हें बताया गया कि यह कार्य बंद हो चुका है। हालांकि, जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है, जहां लगातार लकड़ी का अवैध परिवहन जारी है।
मौके पर मौजूद एक ट्रैक्टर चालक से जब ठेकेदार का संपर्क नंबर मांगा गया, तो उसने देने से इनकार कर दिया और फोन पर किसी अन्य व्यक्ति से बात कराई। फोन पर बात करने वाले व्यक्ति ने खुद को वन विभाग से जुड़ा चौकी बीट अधिकारी बताया, जिससे पूरे मामले में विभागीय मिलीभगत की आशंका और गहरा गई है। सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि बिना सरकारी मोहर लगी लकड़ी आखिरकार कई किलोमीटर दूर वन निगम तक कैसे पहुंच रही है। क्या यह केवल लापरवाही है या फिर इसके पीछे कोई संगठित तंत्र काम कर रहा है?
वहीं, बिना नंबर प्लेट और ओवरलोड वाहनों की आवाजाही पर परिवहन विभाग की चुप्पी भी कई सवाल खड़े कर रही है। नियमों की इस खुली अनदेखी से न केवल सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है, बल्कि आम जनता की सुरक्षा भी दांव पर लगी हुई है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएफओ से तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। उन्होंने दोषी अधिकारियों और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की अपील की है।




