देहरादून में रिहायशी इलाकों में पेट्रोल पंप पर NGT सख्त, जारी किया नोटिस

देहरादून। देहरादून के आवासीय क्षेत्रों में पेट्रोल एवं डीज़ल पंप स्थापित करने के मुद्दे पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने गंभीर रुख अपनाते हुए उत्तराखंड सरकार और अन्य संबंधित प्राधिकरणों को नोटिस जारी किया है। अधिकरण ने इस मामले को पर्यावरणीय मानकों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय मानते हुए सभी पक्षों से जवाब तलब किया है।
यह मामला मूल आवेदन संख्या 165/2026 के तहत दायर याचिका में सामने आया है, जिसे देहरादून निवासी रोशन जोशी द्वारा प्रस्तुत किया गया है। इस याचिका में वर्ष 2013 में जारी उस अधिसूचना को चुनौती दी गई है, जिसके माध्यम से देहरादून मास्टर प्लान 2025 में संशोधन कर रिहायशी इलाकों में पेट्रोल पंप स्थापित करने की अनुमति प्रदान की गई थी।
मामले की सुनवाई राष्ट्रीय हरित अधिकरण की प्रधान पीठ, नई दिल्ली में माननीय न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव (अध्यक्ष) एवं विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफ़रोज़ अहमद की पीठ द्वारा की गई। सुनवाई के दौरान आवेदक की ओर से दलील दी गई कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा 7 जनवरी 2020 को जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार आवासीय क्षेत्रों में पेट्रोल पंप की स्थापना की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसके बावजूद देहरादून के संबंधित प्राधिकरण मास्टर प्लान 2025 का हवाला देते हुए ऐसे पेट्रोल पंपों को स्वीकृति दे रहे हैं। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि इस संबंध में प्राप्त एक आरटीआई जवाब से स्पष्ट होता है कि नियमों के विपरीत जाकर अनुमति दी जा रही है, जो पर्यावरणीय मानकों और आम जनता के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
अधिकरण ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रतिवादियों को निर्देशित किया है कि वे अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पूर्व ई-फाइलिंग के माध्यम से अपना जवाब शपथपत्र के रूप में प्रस्तुत करें। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई पक्ष अधिवक्ता के बिना स्वयं जवाब दाखिल करता है, तो उसे वर्चुअल माध्यम से सुनवाई में उपस्थित रहकर अधिकरण की सहायता करनी होगी।
इसके अलावा, अधिकरण ने आवेदक को निर्देश दिया है कि वह सभी प्रतिवादियों को नोटिस की सेवा सुनिश्चित करे और अगली तिथि से पूर्व सेवा का शपथपत्र दाखिल करे। अधिकरण ने आवेदक को यह अनुमति भी प्रदान की है कि वह वाद शीर्षक में संशोधन कर संबंधित पेट्रोल पंप को भी पक्षकार बना सके। इसके लिए तीन दिनों का समय निर्धारित किया गया है। मामले की अगली सुनवाई 3 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है। इस मामले को लेकर देहरादून सहित उत्तराखंड में शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण को लेकर नई बहस छिड़ने की संभावना है।




