ज्योतिर्मठ में रमजान का पहला जुम्मा शांतिपूर्ण संपन्न, निजी आवासों में अदा हुई नमाज

ज्योतिर्मठ। सीमांत क्षेत्र ज्योतिर्मठ में रमजान माह का पहला जुम्मा पूरी तरह शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। हाल ही में नगर पालिका हॉल में नमाज को लेकर उपजे विवाद के बाद मुस्लिम समुदाय ने प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए सार्वजनिक स्थानों के बजाय निजी आवासों में नमाज अदा की। पूरे क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। ज्योतिर्मठ स्थित हिमायत लॉज में शरीफ सिद्दीकी के आवास पर मुस्लिम समुदाय के लोग एकत्रित हुए और जुमे की नमाज अदा की। कारीद मौसिन ने नमाज पढ़वाई। इस अवसर पर हाजी नसीम, मोहम्मद अला दिया, बिलाल अहमद और सलीम राजा सहित समुदाय के कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। नमाज के बाद उत्तराखंड समेत पूरे देश में सुख, शांति और समृद्धि के लिए विशेष दुआ मांगी गई। समुदाय के लोगों ने अमन और भाईचारे का संदेश भी दिया।
नमाज के बाद स्थानीय निवासी सलीम राजा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि हाल ही में नगर पालिका हॉल को लेकर जो विवाद सामने आया था, उससे क्षेत्र के आपसी भाईचारे पर कोई असर नहीं पड़ा है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, हम लोग यहाँ 1960 के दशक से रह रहे हैं। ज्योतिर्मठ की मिट्टी से हमें गहरा लगाव है। हमारा समुदाय कभी भी क्षेत्र का माहौल खराब करने के पक्ष में नहीं रहा है। साथ ही उन्होंने प्रशासन से मांग की कि यदि कोई बाहरी व्यक्ति क्षेत्र की शांति भंग करने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
जुमे की नमाज को लेकर पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। कोतवाल डी.एस. रावत ने स्वयं व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और बताया कि पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई है। उन्होंने दोनों समुदायों के प्रबुद्ध नागरिकों से अपील की कि क्षेत्र में वर्षों से चली आ रही सांप्रदायिक सद्भावना को बनाए रखने में सहयोग करें। पुलिस ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया और संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की अफवाह या भ्रामक स्थिति उत्पन्न न हो। प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच इस बात पर भी सहमति बनी कि पहाड़ों में बढ़ती बाहरी आवाजाही की जांच आवश्यक है। स्थानीय मुस्लिम प्रतिनिधियों ने भी प्रशासन के सत्यापन अभियान का समर्थन किया और कहा कि नए आने वाले लोगों की पहचान सुनिश्चित करना सुरक्षा की दृष्टि से जरूरी है, ताकि देवभूमि की मर्यादा और शांति बनी रहे।
ज्योतिर्मठ में रमजान का पहला जुम्मा शांति और आपसी समझ के साथ संपन्न होना इस बात का संकेत है कि संवाद और सहयोग से किसी भी विवाद को सुलझाया जा सकता है। प्रशासन और समुदाय के संयम ने क्षेत्र में सद्भाव बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।




