राजधानी देहरादून में संकेतिक,तो ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण सहित पहाड़ी जिलों में मिलाजुला रहा उत्तराखंड बंद..

देहरादून(11 जनवरी 2025)
उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर प्रदेश की राजनीति और सामाजिक विमर्श के केंद्र में आ गया है।मामले में न्याय की मांग को लेकर 11 जनवरी को पूरे प्रदेश में उत्तराखंड बंद का आह्वान किया गया।बंद का असर पहाड़ी जिलों में व्यापक रूप से देखने को मिला,जबकि मैदानी क्षेत्रों में इसका प्रभाव सीमित और मिला-जुला रहा।
अंकिता भंडारी न्याय यात्रा के तहत विभिन्न सामाजिक संगठनों, महिला समूहों और राजनीतिक दलों ने बंद का समर्थन किया। आंदोलनकारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा 9 जनवरी को सीबीआई जांच की संस्तुति किए जाने के बावजूद यह कदम केवल औपचारिक है और इससे पीड़ित परिवार को वास्तविक न्याय मिलता नहीं दिख रहा।
चमोली जिले के गैरसैंण,गोपेश्वर,कर्णप्रयाग और नंदानगर में बाजार पूरी तरह बंद रहे।टैक्सी यूनियनों के समर्थन से सड़कों पर वाहनों की आवाजाही कम रही।रुद्रप्रयाग, पौड़ी और श्रीनगर में भी अधिकांश दुकानें बंद रहीं।व्यापारियों ने स्वेच्छा से बंद का समर्थन करते हुए कहा कि अंकिता के साथ घोर अन्याय हुआ है और दोषियों को कठोरतम सजा मिलनी चाहिए।टिहरी जिले के घनसाली, लंबगांव और नरेंद्रनगर सहित मुख्य बाजारों में भी बंद का व्यापक असर देखने को मिला। वहीं कोटद्वार में बंद का प्रभाव आंशिक रहा, जहां अपील के बाद कुछ स्थानों पर दुकानें बंद कराई गईं।
राजधानी देहरादून, हरिद्वार, रुड़की, हल्द्वानी और काशीपुर जैसे मैदानी शहरों में बंद का असर अपेक्षाकृत कम रहा। दून उद्योग व्यापार मंडल और दून वैली महानगर उद्योग व्यापार मंडल ने स्पष्ट किया कि सीबीआई जांच की संस्तुति के बाद बंद का कोई औचित्य नहीं रह जाता।व्यापार संगठनों ने आमजन की दैनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बाजार खुले रखने का निर्णय लिया।देहरादून में कांग्रेस सहित अन्य संगठनों ने घंटाघर से पलटन बाजार तक मार्च निकाला, हालांकि कुछ समय बाद अधिकांश दुकानों को दोबारा खोल दिया गया।
बंद के मद्देनज़र पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। देहरादून के एसएसपी अजय सिंह ने चेतावनी दी कि जबरन बंद कराने या कानून व्यवस्था भंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप ने बताया कि संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार पीड़ित परिवार की भावनाओं का सम्मान करते हुए सीबीआई जांच की संस्तुति कर चुकी है। वहीं आंदोलनकारी इसे नाकाफी बताते हुए निष्पक्ष और त्वरित न्याय की मांग पर अड़े हुए हैं।प्रदेश में बंद भले ही पूरी तरह सफल न रहा हो, लेकिन अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर जनाक्रोश और न्याय की मांग एक बार फिर सड़कों पर साफ दिखाई दी।




