क्राइम
Trending

देहरादून लिंक के साथ अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का भंडाफोड़,6 गिरफ्तार…

देहरादून/कानपुर:

कानपुर में निजी अस्पतालों में चल रहे कथित अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का पुलिस ने पर्दाफाश किया है, जिसने कई राज्यों को हिला कर रख दिया है। इस सनसनीखेज मामले में उत्तराखंड, खासकर देहरादून का भी सीधा कनेक्शन सामने आया है। पुलिस जांच में पता चला है कि कथित किडनी डोनर आयुष, जो मूल रूप से बिहार का निवासी है, वर्तमान में देहरादून के एक कॉलेज में एमबीए अंतिम वर्ष का छात्र है। इसी कड़ी को आधार बनाकर अब जांच एजेंसियां देहरादून एंगल की भी गहराई से पड़ताल कर रही हैं।

सूत्रों के अनुसार, बिचौलिया शिवम अग्रवाल ने आयुष से संपर्क कर उसे किडनी देने के बदले लाखों रुपये का लालच दिया। प्रारंभिक सौदा चार लाख रुपये में तय हुआ था, लेकिन डोनर को पूरी रकम नहीं मिलने पर विवाद खड़ा हो गया। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और पूरे रैकेट का खुलासा हो गया।

जांच में सामने आया है कि मेरठ निवासी एक महिला मरीज को पहले अंबेडकरपुरम स्थित मेडलाइफ अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिसके बाद कथित रूप से केशवपुरम स्थित आहूजा मेडिकल सेंटर में किडनी ट्रांसप्लांट किया गया। पुलिस को संदेह है कि यह सर्जरी बिना आवश्यक अनुमति और वैधानिक प्रक्रिया के की गई, जो गंभीर कानूनी उल्लंघन है। उल्लेखनीय है कि कानपुर में केवल एक निजी अस्पताल को ही किडनी ट्रांसप्लांट की आधिकारिक अनुमति प्राप्त है, ऐसे में अन्य अस्पताल में इस तरह की प्रक्रिया होना कई सवाल खड़े करता है।

पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि देहरादून में पढ़ाई कर रहे छात्र को आर्थिक तंगी या फीस की जरूरत के चलते इस गिरोह ने निशाना बनाया। आशंका है कि यह नेटवर्क अन्य राज्यों के छात्रों और आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को भी इसी तरह फंसा रहा था।

प्राथमिक जांच में इस रैकेट के तार देहरादून, मेरठ, दिल्ली, लखनऊ और बिहार तक फैले होने की बात सामने आई है। पुलिस ने अस्पताल संचालकों, चिकित्सकों और बिचौलियों समेत कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा (अस्पताल संचालक), डॉ. प्रीति आहूजा (सह-संचालक), डॉ. राजेश कुमार, डॉ. नरेंद्र सिंह, राम प्रकाश और बिचौलिया शिवम अग्रवाल शामिल हैं।

वहीं,इस मामले में कुछ अन्य आरोपी अभी फरार हैं,जिनमें डॉ. रोहित उर्फ राहुल (लखनऊ लिंक), डॉ. अफजल (मेरठ लिंक), वैभव और डॉ. अनुराग उर्फ अमित शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि मामला केवल अवैध ट्रांसप्लांट तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि इसमें अंग तस्करी जैसे गंभीर अपराधों की भी आशंका है। फिलहाल सभी पहलुओं पर गहन जांच जारी है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button