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देहरादून में कोठी कब्जाने की कोशिश मामला: तत्कालीन एसएसपी और थाना प्रभारी पर कार्रवाई की संस्तुति

देहरादून। राजधानी के क्लेमेंटटाउन क्षेत्र में चार वर्ष पहले हुई कोठी कब्जाने की कोशिश के बहुचर्चित मामले में राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण ने बड़ा फैसला दिया है। प्राधिकरण ने तत्कालीन एसएसपी जन्मेयजय खंडूरी और तत्कालीन थाना प्रभारी क्लेमेंटटाउन नरेन्द्र गहलावत के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति करते हुए अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी है।

यह मामला वर्ष 2022 में क्लेमेंटटाउन थाना क्षेत्र के सुभाष नगर स्थित एक कोठी पर जेसीबी चलाकर कब्जा करने के प्रयास से जुड़ा है। शिकायत में पुलिस पर भूमाफियाओं के साथ मिलीभगत और समय पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया गया था।

मामले की शिकायतकर्ता कुसुम कपूर पत्नी स्व. विनोद कुमार कपूर, निवासी सोसाइटी एरिया सुभाष नगर क्लेमेंटटाउन देहरादून ने राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर कुछ लोगों ने घर में घुसकर तोड़फोड़ की और कीमती सामान, दस्तावेज और जेवरात ट्रकों में भरकर ले जाने की कोशिश की। पीड़िता के अनुसार, घटना के समय वह उपचार के लिए नोएडा गई हुई थीं। उसी दौरान 7 जनवरी 2022 को घर में तोड़फोड़ और लूटपाट की सूचना उनकी बेटी को मिली। पीड़िता की बेटी प्रीति खट्टर ने कहा कि अगर पुलिस समय पर कार्रवाई करती तो उनका घर बर्बाद नहीं होता। अगर पुलिस ने सही तरीके से काम किया होता तो हमारा घर नहीं लूटता। माता-पिता की जिंदगी भर की कमाई बर्बाद हो गई। पूरा घर तोड़ दिया गया। यह मकान 1930 में बना था। आरोपित पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होना चाहिए। हमें न्याय के लिए चार साल से कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ रही है।

कुसुम कपूर का आरोप है कि जब उन्होंने तत्कालीन थाना प्रभारी नरेन्द्र गहलावत से कार्रवाई न करने का कारण पूछा तो उन्हें धमकाया गया और उल्टा मुकदमा दर्ज करने की चेतावनी दी गई। पीड़िता का कहना है कि करीब 10 घंटे तक घर में लूटपाट और तोड़फोड़ चलती रही, लेकिन पुलिस ने तत्काल कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

परिवार ने बाद में तत्कालीन डीजीपी अशोक कुमार से मुलाकात कर मामले की शिकायत की। इसके बाद अमित यादव, मौना रंधावा, सौरव कपूर सहित अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई, हालांकि पीड़ित पक्ष का आरोप है कि यह कार्रवाई भी पांच दिन की देरी से हुई।

शिकायतकर्ता के अनुसार, शुरुआत में पुलिस ने हल्की धाराओं में मामला दर्ज किया, जिसके विरोध में 21 जनवरी को प्रेस वार्ता की गई। इसके बाद तत्कालीन डीजीपी के आदेश पर थाना प्रभारी नरेंद्र गहलावत को निलंबित कर दिया गया और मामले की जांच हरिद्वार पुलिस को सौंप दी गई।

सुनवाई के दौरान तत्कालीन एसएसपी जन्मेयजय खंडूरी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि शिकायत मिलने के बाद 17 जनवरी को मुकदमा दर्ज कर लिया गया था और मामले की जांच हरिद्वार पुलिस द्वारा की जा रही है। जांच में एसओजी की टीम को भी लगाया गया है और विवेचनात्मक कार्रवाई जारी है।

राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण ने मामले की सुनवाई के बाद पाया कि पुलिस स्तर पर लापरवाही और उचित कार्रवाई में देरी के आरोप गंभीर हैं। इसी आधार पर प्राधिकरण ने तत्कालीन एसएसपी और थाना प्रभारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति करते हुए रिपोर्ट शासन को भेज दी है।

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