गौचर मेला बना स्थानीय उत्पादों का केंद्र,काले जौ का आटा और रोजमेरी तेल की जोरदार मांग..

गौचर(उत्तराखंड)
73वें राजकीय औद्योगिक एवं सांस्कृतिक गौचर मेले में इस बार स्थानीय उत्पादों का जादू खूब चल रहा है। विभागों और स्वयं सहायता समूहों के स्टालों पर काले जौ का आटा और रोजमेरी का तेल सबसे अधिक पसंद किए जा रहे उत्पादों में शामिल हैं।
मेले में इंस्टीट्यूट ऑफ़ हिमालयन एनवायरनमेंट रिसर्च एंड एजुकेशन (अल्मोड़ा) और भूमियाल देवता स्वयं सहायता समूह, रामणी (नंदानगर) ने अपने स्टाल लगाकर लेमनग्रास व रोजमेरी का तेल, साथ ही काले जौ के उत्पादों की बिक्री शुरू की है, जिन्हें लोगों से बेहतरीन प्रतिक्रिया मिल रही है।
काले जौ की खास खेती केवल नंदानगर में….
चमोली के जिला कृषि अधिकारी जेपी तिवारी के अनुसार काले जौ की खेती नंदानगर क्षेत्र के रामणी और बूरा गांवों में हो रही है, जबकि उत्तराखंड के अन्य जिलों में इसकी खेती लगभग नदारद है।उन्होंने बताया कि काले जौ के आटे में एन्थोसाइनिन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं। विशेष रूप से डायबिटीज के रोगियों के लिए यह आटा औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है।
रोजमेरी तेल मेले में सस्ता और लोकप्रिय…
INHERE संस्था की कोऑर्डिनेटर गीता बिष्ट ने बताया कि उनकी संस्था द्वारा रोजमेरी का तेल और अर्क तैयार कर स्टाल में उपलब्ध कराया गया है।आम बाजार में रोजमेरी तेल की 100 ग्राम शीशी की 500 रुपये कीमत है,जबकि मेले में इसे मात्र 200 रुपये में बेचा जा रहा है,इसी वजह से इसकी भारी मांग बनी हुई है।रोजमेरी का तेल बाल झड़ने को रोकने और हेयर ग्रोथ में बेहद प्रभावी माना जाता है।
स्थानीय महिलाओं की मेहनत चमकी…
भूमियाल देवता स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष गुड्डी देवी ने बताया कि मेले में काले जौ के आटे की अप्रत्याशित मांग देखने को मिल रही है।उन्होंने कहा कि यह आटा न सिर्फ पोषक है, बल्कि डायबिटीज जैसे रोगों से पीड़ित लोगों के लिए बेहद फायदेमंद भी है।स्थानीय महिलाओं के उत्पादों को मिल रही इस लोकप्रियता से समूहों का मनोबल बढ़ा है।




