भ्रष्टाचार

हरिद्वार में कर चोरी का बड़ा खुलासा: इलेक्ट्रॉनिक फर्म पर छापा, 7.77 करोड़ रुपये GST मौके पर जमा

हरिद्वार। उत्तराखंड में कर चोरी के खिलाफ राज्य कर विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए हरिद्वार स्थित इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने और बेचने वाली एक फर्म पर छापेमारी की। जांच के दौरान करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। विभाग की सख्ती के बाद फर्म को मौके पर ही 7.77 करोड़ रुपये जीएसटी जमा करना पड़ा, जो इस वित्तीय वर्ष में जांच के दौरान जमा कराई गई सबसे बड़ी रकम बताई जा रही है। राज्य कर विभाग की सेंट्रल इंटेलीजेंस यूनिट (CIU) ने आयुक्त राज्य कर सोनिका के निर्देश पर 12 मार्च 2026 को हरिद्वार में स्थित इलेक्ट्रॉनिक गुड्स निर्माण और बिक्री से जुड़ी फर्म के व्यापारिक प्रतिष्ठान पर जांच की। विभाग को पहले से ही सूचना मिल रही थी कि कंपनी के लेनदेन में कई संदिग्ध गतिविधियां हो रही हैं और कर भुगतान के पैटर्न में असामान्य बदलाव दिखाई दे रहा है।

जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी का व्यापारिक ढांचा पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बदला है। पहले जहां कंपनी मुख्य रूप से मैन्युफैक्चरिंग पर आधारित थी, वहीं बाद में उसका कारोबार ट्रेडिंग नेटवर्क पर केंद्रित हो गया। इसके साथ ही कंपनी का टर्नओवर बढ़ता गया, लेकिन कर भुगतान में लगातार कमी दर्ज की गई। राज्य कर विभाग की जांच में खुलासा हुआ कि फर्म ने दूसरे राज्यों की कई कंपनियों के साथ मिलकर एक जटिल नेटवर्क बनाया हुआ था। इस नेटवर्क के जरिए कागजों में ही माल की खरीद-बिक्री दिखाई जाती थी, जबकि वास्तविकता में माल का लेनदेन नहीं होता था। अधिकारियों के अनुसार कंपनियां आपस में फर्जी बिल बनाकर कारोबार दिखाती थीं। इससे कागजों में कारोबार बढ़ता हुआ नजर आता था, लेकिन वास्तविक टैक्स भुगतान बेहद कम होता था। कई मामलों में माल प्राप्त किए बिना ही बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ लिया गया।

जांच को मजबूत बनाने के लिए विभाग की टीमों ने गोपनीय रूप से ट्रांसपोर्टरों से भी जानकारी जुटाई। इस दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि जिन माल की आवाजाही कागजों में दिखाई जा रही थी, उनका वास्तविक परिवहन हुआ ही नहीं था। दस्तावेजों और ट्रांसपोर्टरों से मिली जानकारी के मिलान के बाद यह साफ हो गया कि कई मामलों में केवल कागजी लेनदेन दिखाकर कर देनदारी कम की जा रही थी।

कार्रवाई के दौरान विभाग ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल उपकरण भी जब्त किए हैं। इन डिजिटल रिकॉर्ड में लेनदेन और बिलिंग से संबंधित अहम डेटा होने की संभावना है। डिजिटल साक्ष्यों की जांच के लिए फॉरेंसिक टीम की मदद ली जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इन रिकॉर्ड की जांच से इस नेटवर्क में शामिल अन्य फर्मों और व्यक्तियों का भी पता चल सकता है। राज्य कर विभाग की टीमों ने फर्म के प्रतिष्ठान पर देर रात तक जांच की। जांच के दौरान मिले सबूतों और विभाग की सख्ती के बाद फर्म ने मौके पर ही 7.77 करोड़ रुपये का जीएसटी जमा कर दिया। विभाग के अनुसार यह इस वित्तीय वर्ष में किसी भी जांच के दौरान जमा कराई गई सबसे बड़ी राशि है।

इस कार्रवाई के लिए विभाग ने चार टीमों का गठन किया था, जिनमें कुल 15 अधिकारियों को शामिल किया गया।
टीम में उपायुक्त विनय पांडे, योगेश मिश्रा, निखिलेश श्रीवास्तव, सहायक आयुक्त रजनीकांत शाही, मानवेंद्र सिंह, नीतिका नारंग, गार्गी बहुगुणा, अविनाश झा तथा राज्य कर अधिकारी शिवपाल सिंह, शैलेन्द्र चमोली, गजेन्द्र भण्डारी, दुर्गेश पुरोहित, रजत कुमार, क्षितिज रायजादा और हेमा नेगी शामिल रहे। राज्य कर आयुक्त सोनिका ने कहा कि विभाग कर चोरी और धोखाधड़ी के मामलों को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार के राजस्व को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों का मानना है कि जब्त दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड के विश्लेषण के बाद इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। यदि फर्जी बिलिंग नेटवर्क व्यापक स्तर पर संचालित होता पाया गया तो जांच की आंच अन्य फर्मों तक भी पहुंच सकती है।

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