
देहरादून(बद्रीनाथ)
बदरीनाथ धाम में कथित चढ़ावा चोरी के मामलें के बाद अब सुगम दर्शन के लिए 1100 रुपये शुल्क वसूले जाने को लेकर उठ रहे सवालों के बीच श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने इसे भीड़ नियंत्रण और प्रोटोकॉल व्यवस्था के दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाया गया आवश्यक कदम बताया है।समिति के मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने दूरभाष पर बताया कि पूर्व में प्रोटोकॉलधारी श्रद्धालुओं से 500 रुपये शुल्क लिया जाता था।इस वर्ष यात्रा सीजन के शुरुआती चरण में बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रोटोकॉल पत्रों के साथ धाम पहुंचे,जिससे समिति कार्यालय और मंदिर परिसर में भारी दबाव उत्पन्न हो गया।
बदरीकेदार मंदिर समिति के मुख्य कार्यधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने बताया कि 1100₹ शुल्क की व्यवस्था सिर्फ प्रोटोकॉल प्राप्त श्रद्धालुओं के लिए लागू थी।जबकि आम श्रद्धालुओं के दर्शन पूर्व से चलती आ रही व्यवस्था से जारी थे।
सीईओ के अनुसार,कुछ लोग प्रोटोकॉल पत्रों का अनुचित लाभ उठाकर प्रोटोकॉल कार्यालय के बाहर गेट पर अनावश्यक भीड़ बढ़ा रहे थे,जिससे श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ-साथ कानून-व्यवस्था की स्थिति भी प्रभावित होने लगी थी।ऐसे में समिति ने तात्कालिक व्यवस्था के रूप में प्रोटोकॉल पत्रधारकों के लिए 1100 रुपये शुल्क निर्धारित किया।सुगम दर्शनों को लेकर 1100 रुपये शुल्क लिए जाने को लेकर पूर्व में SOP भी जारी की गई थी,साथ ही यह प्रस्ताव आगामी बोर्ड बैठक में भी रखा जाना प्रस्तावित भी किया जाना था।
रांगड़ ने दावा किया कि श्रद्धालुओं ने स्वेच्छा से यह शुल्क जमा किया और दर्शन व्यवस्था को लेकर कोई आपत्ति अथवा शिकायत प्राप्त नहीं हुई।जिसकी श्रद्धालुओं को प्राप्ति रसीद भी दी गई।समिति के आंकड़ों के अनुसार 29 मई से 9 जुलाई तक सुगम दर्शन शुल्क के रूप में 1 करोड़ 63 लाख 11 हजार 900 रुपये की आय हुई है।यह राशि हर दूसरें दिन समिति के खाते में जमा कराई जा रही है।उन्होंने स्पष्ट किया कि दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए पृथक प्रवेश द्वार की व्यवस्था पूर्ववत जारी है तथा उनसे किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता।




