
देहरादून( विजय कुमार)
राजधानी देहरादून में सोमवार को रायपुर क्षेत्र में हुए ट्रिपल मर्डर ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था और पुलिसिंग की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। घर के भीतर बुजुर्ग दंपती और उनकी मेड की हत्या की घटना ने लोगों को दहशत में डाल दिया है। लगातार सामने आ रही गंभीर आपराधिक घटनाओं के बीच अब पुलिस की कार्यप्रणाली और अपराध नियंत्रण की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
सवाल इसलिए भी गंभीर है क्योंकि प्रदेश सरकार ने अपराध पर प्रभावी नियंत्रण और पुलिसिंग को मजबूत करने के उद्देश्य से बीते वर्ष प्रदेश के 58 थानों को उच्चीकृत कर कोतवाली का दर्जा दिया था। इसके साथ ही 58 उपनिरीक्षकों को निरीक्षक पद पर पदोन्नति भी दी गई थी, ताकि उच्चीकृत कोतवालियों में इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों की तैनाती सुनिश्चित हो सके।
हालांकि,स्थिति यह है कि पदोन्नति पाने वाले कई इंस्पेक्टर कोतवालियों की कमान संभालने के बजाय पुलिस लाइन,एसएसपी कार्यालय और पुलिस मुख्यालय में विभिन्न सरकारी जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं।दूसरी ओर,जिन थानों को कोतवाली का दर्जा दिया गया है,उनमें कई जगह सब इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों को ही प्रभारी बनाया गया है।
राजधानी में यह स्थिति और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। रायपुर थाना क्षेत्र को भी कोतवाली का दर्जा दिया गया है।आबादी और क्षेत्रफल के लिहाज से रायपुर राजधानी के महत्वपूर्ण पुलिस क्षेत्रों में शामिल है। इसके बावजूद यहां इंस्पेक्टर के बजाय सब इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी संजीत कुमार को कोतवाली प्रभारी की जिम्मेदारी दिए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
राजधानी की अन्य उच्चीकृत कोतवालियों में भी कमोबेश यही स्थिति सामने आ रही है।राजपुर में सब इंस्पेक्टर पीडी भट्ट,प्रेमनगर में गिरीश नेगी,बसंत विहार में अमित शर्मा,रायपुर में मोहन ठगुना, सहसपुर में मनोज नौटियाल और कालसी में सब इंस्पेक्टर विवेक राठी के पास कोतवाली की जिम्मेदारी होने की जानकारी सामने आई है।ऐसे में सवाल यह है कि जब सरकार ने थानों को कोतवाली का दर्जा दिया और इसके लिए इंस्पेक्टरों की पदोन्नति भी की,तो फिर इन कोतवालियों में इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों की तैनाती क्यों नहीं की जा रही है?
पुलिस व्यवस्था में अधिकारी का रैंक केवल पद का सवाल नहीं है। बड़े और संवेदनशील पुलिस क्षेत्रों में वरिष्ठ अधिकारी की तैनाती का सीधा संबंध निगरानी, अपराध की समीक्षा,विवेचनाओं की मॉनिटरिंग और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी से होता है।ऐसे में कोतवाली का दर्जा दिए जाने के बाद भी यदि उसकी कमान सब इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी के हाथ में रहती है तो उच्चीकरण की व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
पुलिस मुख्यालय की ओर से समय-समय पर कोतवालियों में इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों की तैनाती को लेकर निर्देश दिए जाते रहे हैं।ऐसे में राजधानी की स्थिति को देखते हुए यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि प्रदेश के दूसरे जिलों में उच्चीकृत कोतवालियों की वास्तविक स्थिति क्या है? वहां कितनी कोतवालियों में इंस्पेक्टर तैनात हैं और कितनी जगह सब इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं?
रायपुर के ट्रिपल मर्डर जैसी गंभीर घटना के बाद यह सवाल और महत्वपूर्ण हो गया है कि क्या केवल थानों को कोतवाली का दर्जा देना पर्याप्त है,या फिर उन कोतवालियों को उनके अनुरूप अधिकारी, पुलिस बल और संसाधन भी उपलब्ध कराए जाने चाहिए,क्योंकि अपराध नियंत्रण केवल थानों के नाम और दर्जे बदलने से नहीं,बल्कि जवाबदेही तय करने वाली मजबूत पुलिसिंग व्यवस्था से होता है।




