
उत्तराखंड: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह गोवा में निधन हो गया। 75 वर्षीय नाना पाटेकर को गंभीर कार्डियक अरेस्ट के बाद मणिपाल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। सुबह करीब 5:20 बजे चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके निधन की खबर के बाद फिल्म जगत के साथ उत्तराखंड से जुड़े उनके प्रशंसकों में भी शोक की लहर है।
नाना पाटेकर का उत्तराखंड से खास जुड़ाव रहा। खासतौर पर चमोली के ज्योतिर्मठ यानी जोशीमठ और आसपास की पहाड़ी वादियां उन्हें बेहद पसंद थीं। एक मराठी फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में वह चमोली की चीन सीमा से लगी नीती घाटी पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने नीती, मलारी, तपोवन और लाता क्षेत्र में करीब नौ दिन बिताए।
उत्तराखंड प्रवास के दौरान वह यहां की प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण से काफी प्रभावित हुए। स्थानीय लोगों के मुताबिक, नाना पाटेकर ने जोशीमठ और आसपास के क्षेत्र में जमीन खरीदकर भविष्य में बसने की इच्छा भी जताई थी। वह स्थानीय रहन-सहन और पहाड़ी संस्कृति को जानने में भी दिलचस्पी लेते थे।
इस दौरान उनकी मुलाकात सेना के अधिकारियों और जवानों से भी हुई। तत्कालीन एसडीएम कुमकुम जोशी ने उनसे मुलाकात कर उन्हें स्थानीय सेब और अखरोट भेंट किए थे।
उत्तराखंड से नाना पाटेकर का जुड़ाव ‘ओले आले’ फिल्म के जरिए भी रहा। 2020 के दशक में बनी इस मराठी फिल्म की शूटिंग उत्तराखंड के कई हिस्सों में हुई थी। बताया जाता है कि नाना पाटेकर को चोपता और लोध बुग्याल की खूबसूरत वादियां भी काफी पसंद थीं।
नाना पाटेकर की उत्तराखंड से जुड़ी ये यादें अब उनके प्रशंसकों और पहाड़ से जुड़े लोगों के लिए उनकी एक खास स्मृति बन गई हैं।
