डॉ. कपिल देव पंवार को आईआईटी कानपुर ने किया सम्मानित, शैक्षिक क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए मिला प्रशस्ति पत्र

श्रीनगर (गढ़वाल)। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के बिरला परिसर स्थित हिंदी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. कपिल देव पंवार को उनके उत्कृष्ट शैक्षिक योगदान के लिए आईआईटी कानपुर द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी शैक्षिक पहल के अंतर्गत प्रदान किया गया है, जिसका उद्देश्य देशभर के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और सुलभ अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराना है। डॉ. कपिल देव पंवार को यह सम्मान विशेष रूप से सीयूईटी पीजी (CUET-PG) प्रवेश परीक्षा के लिए डिजिटल शैक्षिक सामग्री तैयार करने में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए दिया गया।
डॉ. कपिल ने हिंदी विषय के लिए लगभग 19 घंटे के विस्तृत व्याख्यान रिकॉर्ड किए हैं। इन व्याख्यानों में विषय की गहराई, सरल भाषा और विद्यार्थियों की समझ को ध्यान में रखते हुए सामग्री तैयार की गई है। उनके द्वारा तैयार किए गए ये वीडियो लेक्चर और अध्ययन संसाधन भारत सरकार के ‘साथी’ पोर्टल पर उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे देशभर के छात्र लाभान्वित हो रहे हैं। डॉ. पंवार ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार की यह पहल डिजिटल माध्यम से शिक्षा को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने बताया कि इस तरह के प्रयास न केवल विद्यार्थियों को बेहतर तैयारी में मदद करते हैं, बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले छात्रों के लिए भी उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा सुनिश्चित करते हैं।
इस सम्मान की खबर मिलते ही विश्वविद्यालय परिसर में खुशी का माहौल है। सहकर्मियों और छात्रों ने डॉ. कपिल को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी और इसे विश्वविद्यालय के लिए गर्व का क्षण बताया। शिक्षकों का मानना है कि इस तरह की उपलब्धियां अन्य शिक्षकों और छात्रों को भी प्रेरित करती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सीयूईटी पीजी जैसी प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के लिए इस प्रकार की डिजिटल सामग्री छात्रों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रही है। इससे उन्हें घर बैठे गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन मिल रहा है और तैयारी का स्तर भी बेहतर हो रहा है। कुल मिलाकर, डॉ. कपिल देव पंवार का यह सम्मान न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि पूरे शैक्षिक जगत और उत्तराखंड के लिए गर्व की बात है।




