धर्मांतरण और आतंकी नेटवर्क का बड़ा खुलासा, अयान जावेद कई राज्यों में जांच के घेरे में

देहरादून। प्रतिबंधित आतंकी संगठन हिज्ब-उत-तहरीर (HUT) से जुड़े झारखंड मॉड्यूल के मुख्य संदिग्ध अयान जावेद का नाम अब बड़े पैमाने पर धर्मांतरण और आतंकी गतिविधियों से जुड़े मामले में सामने आया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, अयान जावेद के तार आगरा और देहरादून सहित कई राज्यों से जुड़े पाए गए हैं। झारखंड एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) ने अयान जावेद को उसके पांच साथियों के साथ वर्ष 2025 में धनबाद के वासेपुर इलाके से गिरफ्तार किया था। जांच में खुलासा हुआ है कि वह लंबे समय से कथित तौर पर धर्मांतरण नेटवर्क और कट्टरपंथी गतिविधियों से जुड़ा हुआ था।
जांच के दौरान सामने आया कि अयान जावेद के खिलाफ देहरादून के रानीपोखरी थाने में भी मुकदमा दर्ज है। यह मामला उत्तराखंड धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2018 की धाराओं के तहत दर्ज किया गया है। देहरादून पुलिस ने इस संबंध में झारखंड एटीएस से संपर्क कर आरोपी से जुड़े दस्तावेज मांगे थे, जिन्हें उपलब्ध करा दिया गया है। देहरादून पुलिस भी जल्द ही अयान जावेद को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर सकती है।
पूरा मामला आगरा में दो सगी बहनों के धर्मांतरण के चर्चित प्रकरण की जांच के दौरान सामने आया। जांच एजेंसियों को पता चला कि इस मामले का मुख्य साजिशकर्ता अयान जावेद है। इसके बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए झारखंड एटीएस के साथ समन्वय कर उसे रिमांड पर लिया। जांच एजेंसियों के अनुसार, अयान जावेद की पत्नी शबनम परवीन भी इस पूरे नेटवर्क में सक्रिय भूमिका निभा रही थी। एटीएस द्वारा जब उसके मोबाइल की जांच की गई तो उसमें कथित तौर पर कई आपत्तिजनक और देश-विरोधी संदेश मिले। इसके बाद से केंद्रीय एजेंसियां और अन्य राज्यों की पुलिस भी सक्रिय हो गई हैं। बताया जा रहा है कि शबनम परवीन फिलहाल जेल में बंद है और उससे भी जल्द पूछताछ की जा सकती है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह कोई छोटा गिरोह नहीं बल्कि एक बड़ा नेटवर्क हो सकता है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क से 200 से अधिक लोगों के जुड़े होने की आशंका है, जो कथित तौर पर युवाओं और खासकर लड़कियों को निशाना बनाकर धर्मांतरण कराने का प्रयास करते थे। 26 अप्रैल 2025 को धनबाद के वासेपुर में एटीएस द्वारा की गई छापेमारी में भारी मात्रा में संदिग्ध दस्तावेज, डिजिटल सामग्री और उपकरण बरामद किए गए थे। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी डार्क नेट के माध्यम से देश-विदेश के संपर्क में थे। लैपटॉप और मोबाइल की जांच में कई संदिग्ध चैट और गतिविधियों के संकेत मिले हैं, जिनकी जांच केंद्रीय एजेंसियां कर रही हैं।
झारखंड एटीएस ने रांची की विशेष अदालत में इस मामले में विस्तृत चार्जशीट दाखिल कर दी है। इसमें बताया गया है कि आरोपी देश में धार्मिक आधार पर हिंसा फैलाने और युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा की ओर आकर्षित करने की साजिश रच रहे थे। चार्जशीट के अनुसार, आरोपियों में अयान जावेद, गुलफाम हसन, मोहम्मद शहजाद आलम, शबनम परवीन और अम्मार यासिर शामिल हैं। इनमें से कुछ आरोपियों के पास से अवैध हथियार, कारतूस और अन्य आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद हुई है।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी अम्मार यासिर पहले प्रतिबंधित आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन से जुड़ा रहा है और पूर्व में गिरफ्तार हो चुका है। जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद वह फिर से संदिग्ध गतिविधियों में शामिल हो गया था। फिलहाल विभिन्न राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की गहन जांच में जुटी हैं। अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।




