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OPS पर बड़ा संकेत,लाखों कर्मचारियों की बढ़ीं उम्मीदें…

नई दिल्ली:शनिवार 6 जून 

8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट को लेकर देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की निगाहें केंद्र सरकार पर टिकी हैं। नवंबर 2025 में गठित आयोग अब अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देने में जुटा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पुरानी पेंशन योजना (OPS) की वापसी होगी या कर्मचारियों को कोई नया विकल्प मिलेगा।

पूर्व सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाला आयोग वेतन, भत्तों और पेंशन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा कर रहा है। आयोग की सिफारिशों का असर करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 65 लाख से अधिक पेंशनर्स पर पड़ सकता है।

देशभर के कर्मचारी संगठन लंबे समय से नई पेंशन योजना (NPS) के बजाय पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि OPS में सेवानिवृत्ति के बाद निश्चित पेंशन की गारंटी मिलती थी, जबकि NPS बाजार आधारित व्यवस्था होने के कारण भविष्य की आय को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है।

OPS के तहत कर्मचारियों को अंतिम मूल वेतन का 50 प्रतिशत पेंशन के रूप में मिलता था और महंगाई भत्ते का लाभ भी मिलता रहता था। वहीं कर्मचारियों के वेतन से कोई अंशदान नहीं काटा जाता था। इसके विपरीत NPS में कर्मचारी और सरकार दोनों का योगदान निवेश योजनाओं में लगाया जाता है, जहां मिलने वाली पेंशन बाजार की स्थिति पर निर्भर करती है।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि OPS की पूर्ण बहाली आसान नहीं होगी। पिछले दो दशकों में NPS के तहत करीब 16.5 लाख करोड़ रुपये का कोष तैयार हो चुका है, जो विभिन्न वित्तीय साधनों में निवेशित है। ऐसे में पुरानी व्यवस्था में लौटना सरकार और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

सूत्रों के अनुसार सरकार कर्मचारियों की मांग और वित्तीय भार के बीच संतुलन बनाने के लिए किसी हाइब्रिड पेंशन मॉडल या यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को और मजबूत करने पर विचार कर सकती है। माना जा रहा है कि कर्मचारियों को न्यूनतम गारंटीड पेंशन जैसी अतिरिक्त सुरक्षा देने के विकल्पों पर भी चर्चा हो रही है।

8वें वेतन आयोग से कर्मचारियों को बेसिक वेतन में बढ़ोतरी, फिटमेंट फैक्टर में संशोधन, पेंशन सुधार और बेहतर सामाजिक सुरक्षा की उम्मीद है। हालांकि पुरानी पेंशन योजना की पूर्ण बहाली को लेकर अभी कोई आधिकारिक संकेत नहीं मिला है, लेकिन आयोग की अंतिम रिपोर्ट कर्मचारियों और पेंशनर्स के भविष्य की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।

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