इस्तीफे के पीछे साजिश? दिव्यांग कोटे पर फर्जीवाड़े के आरोपों में घिरे अयोध्या के प्रशांत सिंह
भाई विश्वजीत सिंह ने दस्तावेजों के साथ खोला मोर्चा, कहा– जांच से बचने के लिए खेला गया ‘इमोशनल कार्ड’

लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में इस्तीफा देकर सुर्खियों में आए अयोध्या के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह का मामला अब नया और गंभीर मोड़ ले चुका है। इस्तीफे के बाद वायरल हुए उनके रोते हुए वीडियो ने जहां सोशल मीडिया पर सहानुभूति बटोरी, वहीं अब उसी कहानी के पीछे कथित फर्जीवाड़े के आरोप सामने आए हैं। प्रशांत सिंह के सगे भाई विश्वजीत सिंह ने दस्तावेजों के साथ सामने आकर आरोप लगाया है कि उनके भाई और बहन दोनों ने दिव्यांग कोटे का फर्जी लाभ लेकर सरकारी सेवाएं हासिल कीं।
2009 में फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र का आरोप
विश्वजीत सिंह ने दावा किया कि वर्ष 2009 में प्रशांत सिंह ने मऊ के तत्कालीन CMO और एक डॉक्टर को गुमराह कर 40% दिव्यांगता का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया इसी प्रमाण पत्र के आधार पर 2011 में पीसीएस परीक्षा में दिव्यांग कोटा हासिल किया , विश्वजीत का कहना है कि यह सीधा-सीधा एक असली दिव्यांग अभ्यर्थी के हक पर डाका है।
बहन जया सिंह पर भी समान आरोप
इतना ही नहीं, विश्वजीत सिंह ने अपनी बहन जया सिंह पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार जया सिंह ने 2013 में उसी डॉक्टर और उसी CMO के हस्ताक्षर से दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाया, उसी प्रमाण पत्र के आधार पर वह तहसीलदार बनीं, वर्तमान में जया सिंह कुशीनगर के हाटा में तहसीलदार के पद पर तैनात हैं, भाई का दावा है कि दोनों के प्रमाण पत्र एक ही दिन, एक ही डॉक्टर और एक ही CMO की मुहर से जारी हुए, जो पूरे मामले को संदिग्ध बनाता है।
जांच से बचते रहे, मेडिकल बोर्ड में नहीं हुए पेश
विश्वजीत सिंह के मुताबिक उन्होंने 16 अगस्त 2021 को इस पूरे मामले की शिकायत मऊ के CMO से की थी। शुरुआती जांच में प्रमाण पत्र संदिग्ध पाए गए, जिसके बाद प्रशांत सिंह और जया सिंह को मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होने के लिए बुलाया गया, 28 सितंबर और 7 अक्टूबर 2021 को मेडिकल बोर्ड बैठा, लेकिन प्रशांत सिंह हाजिर नहीं हुए, जया सिंह के लिए भी तीन बार मेडिकल बोर्ड गठित हुआ, लेकिन वे भी जांच से बचती रहीं , विश्वजीत सिंह ने स्वास्थ्य महानिदेशालय (DG Health) की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि मऊ CMO ने 19 दिसंबर 2025 को DG Health को अर्जेंट पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की, लेकिन महानिदेशालय ने अब तक मामले को ठंडे बस्ते में डाल रखा है, विश्वजीत का आरोप है कि अब तक प्रशांत सिंह जांच को मैनेज करते रहे, लेकिन जब शिकंजा कसने लगा तो उन्होंने इस्तीफे का इमोशनल कार्ड खेला।
‘इस्तीफा देकर जांच से भागना चाहते हैं’
विश्वजीत सिंह का कहना है “प्रशांत सिंह ने एक असली दिव्यांग व्यक्ति का हक मारा है। मैं मुख्यमंत्री और मीडिया से अपील करता हूं कि इन्हें सिस्टम में बनाए रखकर निष्पक्ष जांच कराई जाए। इस्तीफा देकर भागने का मौका न दिया जाए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत के बाद से उन्हें भाई-बहन की ओर से धमकियां मिल रही हैं।
यह मामला न सिर्फ प्रशासनिक ईमानदारी बल्कि दिव्यांग कोटे की पारदर्शिता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग इस पूरे मामले में कब और क्या कार्रवाई करते हैं।




