
हरिद्वार: उत्तराखंड की राजनीति से बड़ी दुखद खबर सामने आई है। उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री फील्ड मार्शल दिवाकर भट्ट का आज निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। रविवार शाम लगभग 4:30 बजे हरिद्वार स्थित अपने तरुण हिमालय निवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली।

कुछ दिनों से उनकी हालत बिगड़ने पर उन्हें देहरादून के इंद्रेश अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ डॉक्टरों ने इलाज जारी रखने में असमर्थता जताई। परिजन उन्हें तीन घंटे पहले ही देहरादून से हरिद्वार वापस लाए थे, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।26 नवंबर को हरिद्वार के खड़खड़ी श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।दिवंगत नेता के बेटे ललित भट्ट ने उनके निधन की पुष्टि की है।
दिवाकर भट्ट उत्तराखंड राज्य आंदोलन के अग्रणी नेताओं में रहे हैं। वे उन नेताओं में शामिल थे, जिनकी आवाज़ ने पर्वतीय राज्य की मांग को मजबूत आधार दिया।आंदोलन के दौरान उनकी इस भूमिका के सम्मान में ही उन्हें ‘फील्ड मार्शल’ की उपाधि दी गई थी।उनके निधन की खबर से राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में गहरा शोक छा गया है। समर्थकों और परिचितों का उनके निवास पर पहुँचना लगातार जारी है।
दिवाकर भट्ट ने बहुत कम उम्र में उत्तराखंड आंदोलन की धारा को पकड़ लिया था।1968 में ऋषिबल्लभ सुंदरियाल के नेतृत्व में दिल्ली में हुई ऐतिहासिक रैली में वे शामिल हुए।1972 में सांसद त्रेपन सिंह नेगी के नेतृत्व में आयोजित आंदोलनकारी रैली में भी उन्होंने भाग लिया।1977 में वे ‘उत्तराखंड युवा मोर्चा’ के अध्यक्ष बने।1978 की बद्रीनाथ–दिल्ली पदयात्रा में उनका नेतृत्व सबसे ज्यादा चर्चित रहा। इस पदयात्रा के बाद आंदोलनकारियों को तिहाड़ जेल तक भेजा गया।
आईटीआई से शिक्षा ग्रहण करने के बाद उन्होंने हरिद्वार स्थित बीएचईएल में कर्मचारी नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई। 1970 में ‘तरुण हिमालय’ संस्था की स्थापना उनके सामाजिक और शैक्षिक जागरूकता के प्रयासों का आधार बनी।गढ़वाल विश्वविद्यालय आंदोलन (1971)पंतनगर विश्वविद्यालय कांड (1978)इन दोनों ही आंदोलनों में वे सक्रिय रूप से जुड़े रहे।1979 में गठन के समय दिवाकर भट्ट ‘उत्तराखंड क्रांति दल’ के संस्थापकों में शामिल हुए और उन्हें संस्थापक उपाध्यक्ष बनाया गया।1994 के राज्य आंदोलन में वे अग्रिम पंक्ति के नेताओं में शामिल थे। आंदोलन कमजोर पड़ने पर उन्होंने नवंबर 1995 में श्रीयंत्र टापू और दिसंबर 1995 में खैट पर्वत पर आमरण अनशन किया।
1982 से 1996 तक वे तीन बार कीर्तिनगर ब्लॉक प्रमुख रहे।2002 में देवप्रयाग सीट से यूकेडी टिकट पर चुनाव लड़ा।2007 में विधायक बने और राज्य में शहरी विकास सहित कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली।2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव उन्होंने लड़े, लेकिन सफलता नहीं मिली।2017 में वे यूकेडी के केंद्रीय अध्यक्ष चुने गए।दिवाकर भट्ट के निधन से उत्तराखंड ने एक ऐसे नेता को खो दिया है, जिसने अपने जीवन का हर क्षण राज्य निर्माण, जनता के अधिकारों और पहाड़ी अस्मिता के लिए समर्पित किया। उनकी संघर्षगाथा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी।




