
नई दिल्ली/देहरादून
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने मसूरी के 49 होटलों में पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूकेपीसीबी) को छह सप्ताह के भीतर विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट में पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की वसूली, लंबित मामलों की प्रगति और सभी होटलों के कंसेंट टू ऑपरेट (सीटीओ) की वर्तमान स्थिति का ब्यौरा देना होगा।
न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ को यूकेपीसीबी ने बताया कि 49 डिफॉल्टर होटलों में से 19 पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का अंतिम निर्धारण कर जुर्माना लगाया जा चुका है। इनमें से कई होटल आदेश के विरुद्ध अपील कर चुके हैं, जबकि कुछ ने अब तक क्षतिपूर्ति राशि जमा नहीं की है। केवल कुछ मामलों में ही भुगतान हुआ है।
बोर्ड के अनुसार शेष 30 होटलों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे। इनमें से 12 पर बाद में पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगा दी गई, जबकि 18 मामलों में कार्यवाही अंतिम चरण में है। बोर्ड ने कहा कि इन मामलों में अगले चार सप्ताह के भीतर अंतिम आदेश पारित कर दिए जाएंगे।
सुनवाई के दौरान अधिकरण ने पाया कि यूकेपीसीबी संबंधित होटलों के सीटीओ की वर्तमान स्थिति स्पष्ट नहीं कर सका। इस पर एनजीटी ने निर्देश दिया कि सभी होटल केवल वैध सीटीओ के साथ ही संचालित हों और पर्यावरणीय मानकों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर, 2026 को होगी।




