शिक्षा

चार साल की मेहनत पर ग्रेडिंग की मार

देहरादून। उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (UTU) की ग्रेडिंग प्रणाली में कथित विसंगतियों को लेकर राज्य के इंजीनियरिंग छात्रों में गहरी नाराज़गी है। बलबीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड प्रौद्योगिकी संस्थान (GBPIET) पौड़ी और अन्य सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों के 2022, 2023 और 2024 बैच के छात्र इन दिनों अपने अंतिम CGPA को लेकर चिंतित हैं। छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय की ग्रेडिंग नीति के कारण उनके अंकों के अनुपात में ग्रेड पॉइंट कम दिए गए, जिससे उनका कुल CGPA 10 से 15 प्रतिशत तक प्रभावित हुआ है। छात्रों के अनुसार UTU की वर्तमान नीति में 70 से 79 प्रतिशत अंक प्राप्त करने पर केवल 7 ग्रेड पॉइंट (B+) दिए जाते हैं।जबकि देश के अन्य प्रमुख संस्थानों जैसे HBTU कानपुर, IIT रुड़की और NIT जालंधर में इसी अंक सीमा पर 8 ग्रेड पॉइंट दिए जाते हैं। यदि किसी छात्र ने 4 क्रेडिट वाले विषय में 75% अंक प्राप्त किए तो UTU छात्र को मिलते हैं 7 × 4 = 28 पॉइंट और अन्य संस्थानों में मिलते हैं 8 × 4 = 32 पॉइंट। यानी प्रति विषय 4 पॉइंट का सीधा अंतर। यह अंतर 8 सेमेस्टर में जुड़ते-जुड़ते अंतिम CGPA को उल्लेखनीय रूप से कम कर देता है। प्रभावित छात्रों का कहना है कि उन्होंने पहले वर्ष से ही यह मुद्दा उठाना शुरू किया था। उन्हें आश्वासन दिया गया कि अंतिम वर्ष तक CGPA में संतुलन आ जाएगा। अगस्त–सितंबर 2025 में छात्रों ने डीन और निदेशक स्तर पर शिकायत दर्ज कराई। अक्टूबर 2025 में नई कुलपति डॉ. तृप्ता ठाकुर ने कार्यभार संभाला, जिससे छात्रों को समाधान की उम्मीद जगी। दिसंबर 2025 में हुई एकेडमिक काउंसिल बैठक में ग्रेडिंग टेबल में सुधार किया गया। हालांकि, यह सुधार केवल प्रथम वर्ष के नए छात्रों पर लागू किया गया। 2022, 2023 और 2024 बैच के छात्रों को यह कहकर दायरे से बाहर रखा गया कि ग्रेड शीट दोबारा जारी करना परीक्षा विभाग पर अतिरिक्त कार्यभार होगा। छात्रों के अनुसार इसके गंभीर परिणाम सामने आ रहे हैं , GATE परीक्षा में AIR 22, 452 और 547 जैसी रैंक पाने वाले छात्र कम CGPA के कारण PSU नौकरियों में आवेदन नहीं कर पा रहे। CDS और AFCAT में सफल छात्र 6.5 से कम CGPA होने पर SSB इंटरव्यू से बाहर हो रहे हैं। कई निजी कंपनियों में प्लेसमेंट के लिए न्यूनतम 6.5 CGPA अनिवार्य है, जिससे अधिकांश छात्र वंचित हो रहे हैं। इस पूरे मामले में छात्र विश्वविद्यालय प्रशासन से पुनर्मूल्यांकन या संशोधित CGPA जारी करने की मांग कर रहे हैं।

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