4 साल की मासूम दृष्टि को गुलदार ने बनाया शिकार, घर के आंगन से उठा ले गया मौत का साया

पौड़ी गढ़वाल: सतपुली से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे क्षेत्र में दहशत और गुस्से का माहौल पैदा कर दिया है। तहसील चौबट्टाखाल के अंतर्गत कुंजखाल के समीप ग्राम सभा गाडरी के भतकोट गांव में एक गुलदार (तेंदुआ) ने मात्र 4 साल की मासूम बच्ची को अपना निवाला बना लिया। इस हृदयविदारक घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है और लोग दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं।
जानकारी के अनुसार, मृतक बालिका दृष्टि ने 1 अप्रैल को ही अपने जीवन के तीन वर्ष पूरे कर चौथे वर्ष में प्रवेश किया था। परिवार में खुशी का माहौल अभी ठीक से थमा भी नहीं था कि यह दर्दनाक हादसा हो गया। सामाजिक कार्यकर्ता हर्षवर्धन बिष्ट ने बताया कि गुरुवार रात लगभग 8 बजे दृष्टि अपने पिता हरेंद्र सिंह, माता सविता देवी और 11 वर्षीय बड़ी बहन दीपांशी के साथ घर के किचन में बैठी थी। सब कुछ सामान्य चल रहा था, तभी अचानक घात लगाए बैठे गुलदार ने किचन की देहली पर बैठे बच्चों पर हमला कर दिया।
हमले के दौरान गुलदार ने झपट्टा मारकर दृष्टि को उठा लिया और देखते ही देखते अंधेरे में गायब हो गया। घटना इतनी अचानक और भयावह थी कि परिवार को संभलने का मौका तक नहीं मिला। घरवालों के शोर मचाने पर ग्रामीण तुरंत एकत्र हुए और बच्ची को बचाने के लिए टॉर्च और लाठियों के साथ जंगल की ओर दौड़ पड़े। करीब ढाई किलोमीटर तक खोजबीन के बाद बच्ची का शव गांव से दूर एक गधेरे (नाले) में मिला। इस दृश्य को देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं और गांव में चीख-पुकार मच गई।
घटना की सूचना तुरंत वन विभाग और राजस्व विभाग को दी गई। मौके पर पहुंची टीम ने जांच शुरू कर दी है, लेकिन इस घटना ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में पिछले काफी समय से गुलदार का आतंक बना हुआ है और वह लगातार बच्चों और महिलाओं को निशाना बना रहा है। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही। ग्रामीणों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। उनका साफ कहना है कि जब तक इस गुलदार को आदमखोर घोषित कर मार नहीं दिया जाएगा, तब तक वे शांत नहीं बैठेंगे। कई ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
पूर्व प्रमुख पोखड़ा सुरेंद्र रावत ने भी इस घटना पर गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में गुलदार की सक्रियता लगातार बढ़ रही है और प्रशासन पूरी तरह से निष्क्रिय बना हुआ है। उन्होंने मांग की कि इस गुलदार को तुरंत आदमखोर घोषित कर पकड़ने या मारने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर समस्या को उजागर कर दिया है। सवाल यह है कि आखिर कब तक मासूम लोग इस तरह अपनी जान गंवाते रहेंगे और कब प्रशासन इस पर ठोस और प्रभावी कदम उठाएगा।




