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पहाड़ों से पलायन के चलते कोलाडुंग्री स्कूल में ताला,छात्र संख्या शून्य होने से संकट..

चमोली: चमोली जिले के कर्णप्रयाग ब्लॉक के कोलाडुंग्री गांव का जूनियर हाईस्कूल अब पूरी तरह वीरान हो चुका है।कभी बच्चों की चहल-पहल से गुलजार रहने वाला यह विद्यालय आज छात्र संख्या शून्य होने के कारण बंद होने की कगार पर पहुंच गया है। अंतिम पांच छात्रों के भी स्कूल छोड़ने के बाद यहां ताला लगने की नौबत आ गई है।

साल 1977 में स्थापित इस विद्यालय में एक समय 100 से अधिक छात्र शिक्षा ग्रहण करते थे।आसपास के दूरदराज गांवों से भी बच्चे यहां पढ़ने आते थे, लेकिन समय के साथ छात्र संख्या लगातार घटती गई।पहले यह संख्या 10 पर पहुंची, फिर 5 रह गई और अब पूरी तरह समाप्त हो चुकी है।

ग्रामीणों के अनुसार, स्कूल के बंद होने की मुख्य वजह शिक्षकों की कमी रही। चार में से दो शिक्षकों के स्थानांतरण के बाद विद्यालय की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। ग्राम प्रधान सुशील खंडूड़ी ने बताया कि लंबे समय से अतिरिक्त शिक्षक की मांग की जा रही थी, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया।

अभिभावकों यशवीर सिंह,जसवंत सिंह, जयंती देवी और लक्ष्मी देवी का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन के समक्ष अपनी समस्या रखी, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। शिक्षकों की कमी और भविष्य को लेकर असुरक्षा के चलते अभिभावकों ने मजबूर होकर अपने बच्चों को छह किलोमीटर दूर अन्य स्कूलों में भेजना शुरू कर दिया।

ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं होता, बल्कि यह गांव की सामाजिक गतिविधियों का भी प्रमुख आधार होता है। इसके बंद होने से गांव की रौनक खत्म हो जाती है और पलायन की समस्या और बढ़ जाती है।

चमोली ही नहीं, बल्कि पूरे पहाड़ी क्षेत्र में कई सरकारी स्कूल इसी संकट से जूझ रहे हैं। एक ओर सरकार नामांकन बढ़ाने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर शिक्षक की कमी, संसाधनों का अभाव और पलायन जैसी समस्याएं इन दावों को कमजोर कर रही हैं।शिक्षा विभाग का कहना है कि ऐसे विद्यालयों की समीक्षा कर शिक्षकों का समायोजन किया जाएगा, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल समायोजन से समस्या का समाधान हो पाएगा या फिर पहाड़ में शिक्षा व्यवस्था को बचाने के लिए ठोस नीति की आवश्यकता है।

कोलाडुंग्री का यह बंद होता स्कूल एक चेतावनी है,यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो पहाड़ के कई और स्कूल इसी तरह खामोश हो सकते हैं।

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