
देहरादून।करीब 23 साल पुराने जैनी प्रकरण को लेकर उत्तराखंड की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। जैनी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के एक दिन बाद उत्तराखंड कांग्रेस की चुनाव प्रबंधन समिति के संयोजक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने भी प्रेस वार्ता कर अपना पक्ष रखा। इस दौरान उन्होंने जैनी पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि वह असम में आतंकियों को हथियार सप्लाई करने के मामले में पकड़ी जा चुकी हैं।
हरक सिंह रावत ने कहा कि सीबीआई की जांच में यह तथ्य दर्ज है कि जैनी असम में आतंकियों को हथियार सप्लाई करने के मामले में पकड़ी गई थीं। उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण की जांच पहले भी सीबीआई कर चुकी है और उन्हें क्लीन चिट मिली थी।
जैनी की ओर से डीएनए जांच की मांग उठाए जाने पर हरक सिंह रावत ने कहा कि वह एक बार फिर सीबीआई जांच के लिए तैयार हैं। उन्होंने बताया कि भले ही उस समय जैनी का सैंपल नहीं लिया गया हो, लेकिन तत्कालीन एसडीएम और दून अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने उनका सैंपल लिया था। इसके बाद सीबीआई की ओर से उन्हें क्लीन चिट दी गई थी।
प्रेस वार्ता के दौरान हरक सिंह रावत ने वर्ष 2003 की घटना के करीब 16 साल बाद का एक किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि एक दिन वह अपने घर पर अकेले थे और बाथरूम में नहाने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान दरवाजे की घंटी बजी। जब वह तौलिया लपेटकर दरवाजा खोलने पहुंचे तो बाहर जैनी खड़ी थीं।हरक सिंह ने दावा किया कि उस दिन भी जैनी ने उनसे अपने किए के लिए माफी मांगी थी।
हरक सिंह रावत ने आरोप लगाया कि जैनी भाजपा की ओर से सिखाई गई बातें बोल रही हैं। उन्होंने कहा कि अगर जैनी पहले हुई जांच और न्यायिक प्रक्रिया से संतुष्ट नहीं थीं तो उन्हें प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के बजाय न्यायालय का रुख करना चाहिए था।उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट पर भी निशाना साधते हुए उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराने की बात कही।
प्रेस वार्ता के दौरान हरक सिंह रावत ने जैनी के बेटे को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि जैनी जिस बच्चे की बात कर रही हैं, उन्हें मालूम है कि वह बच्चा किसका है।गौरतलब है कि जैनी ने हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर हरक सिंह रावत पर गंभीर आरोप लगाए थे और पूरे मामले की दोबारा सीबीआई जांच के साथ डीएनए टेस्ट कराने की मांग की थी।अब हरक सिंह रावत के पलटवार के बाद यह मामला एक बार फिर उत्तराखंड की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।




